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सचेत रहना

ऐसा कितनी बार होता है कि...

  • अपनी क्लास के लिए आप लेक्चर हॉल की तरफ जा रहे हैं और अचानक से आपको महसूस होता है कि आप लेक्चर हॉल पहुंच भी गए। वास्तव में चलकर आपका वहाँ तक पहुंचना किसी सपने जैसा लगता है।
  • आप खाना खत्म कर चुके हैं और आपको पता भी नहीं चलता की अपने कब खाना खाया।
  • आप किसी ऐसी चीज से बहुत ज्यादा प्रभावित हो चुके हैं कि आपको अपनी वर्तमान परिस्थिति के बारे में पता ही नहीं चल रहा।
  • कई बार आप प्रतिक्रिया दे चुके होते हैं और आपको उससे जुड़ी भावना का बाद में पता चलता है (आप ऐसा कई बार कर चुके होते हैं)

अगर आप भी बाकी लोगों जैसे ही हैं तो आप इनसे मिलते-जुलते सब तरह के उदाहरण याद करेंगे। हम में से काफी लोगों को ऐसा महसूस होता है कि जैसे हम स्वचालित मोड पर चले गए हो। जब हम किसी चीज से बहुत ज्यादा प्रभावित हो जाते हैं तो हमें पता ही नहीं चलता कि हमारे साथ क्या हो रहा है और हम कर क्या रहे हैं। हमारा ध्यान वर्तमान परिस्थिति में नहीं रहता। अपने जीवन के साथ फिर से जुड़ने का तरीका सचेत होना ही होता है। माइंडफुलनेस या सचेतनता हमें अपने वर्तमान जीवन में ठहराव और परिप्रेक्ष्य हासिल करना सिखाता है।

शुरुआत
सचेतनता

सचेतनता का मतलब वर्तमान क्षण पर ध्यान केंद्रित करना है। इसका मतलब है कि हम अपने आसपास हो रही हर चीज पर अच्छे से ध्यान दे रहे हैं। कई बार ऐसा होता है कि हम ऐसी चीजों के बारे में सोचने लग जाते हैं जो हमारे साथ पहले हो चुकी हैं या फिर हम अपने आने वाले कल को लेकर चिंतित होने लगते हैं जिसकी वजह से हम बहुत परेशान रहने लग जाते हैं। सचेतन रहने का अभ्यास करके हम अपने दिमाग को वर्तमान में रहना और जागरूक होना सिखाते हैं।

सचेतनता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा गैर निर्णायक होना भी है। इसका मतलब यह है कि आप सभी चीजों को देखें, अपने विचार प्रकट करें, उन्हें महसूस करें लेकिन बिना अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए।(जहां कोई सही या कोई गलत नहीं है)

गैर-न्यायिक रूप से हमारे विचारों और भावनाओं का अवलोकन करने की आदत विकसित करने से हम दोबारा पहले जैसी प्रतिक्रिया नहीं देते हैं और हमारी यह आदत हमारे संकट के क्षणों में भी बहुत मदद करती है।

माइंडफुलनेस का अभ्यास करने का कोई एक तरीका नहीं है। जहां कुछ लोग औपचारिक अभ्यास करना पसंद करते हैं, वहीं अन्य लोग अनौपचारिक अभ्यास पसंद करते हैं और जो कुछ भी आता है, उस पर अपना ध्यान केंद्रित करते हैं।

ये सचेतनता के अभ्यास का हिस्सा हैं:

पोडकास्ट सुनें

सचेतन रहने का अभ्यास हम कभी भी कर सकते हैं, अपने व्यस्ततम दिन में भी हम इसके लिए समय निकाल सकते हैं।यदि आपके पास कुछ नया करने के लिए समय नहीं है, तो आप जो पहले से ही कर रहे हैं उस काम को अधिक मन लगाकर करें। शुरुआती दिनों में सचेतन रहने का अभ्यास करते वक्त मन भटकना बहुत ही स्वाभाविक है। मन भटकने की स्थिति पर गौर करना भी अच्छा ही है। अपने साथ जितना हो सके नम्रता से रहें और दोबारा अपना ध्यान अभ्यास की ओर केंद्रित करने की कोशिश करें। भले ही थोड़ी देर के लिए हो मगर अभ्यास करना शुरू करें।

हर दिन सचेतना का अभ्यास को करने के तरीके

माइंडफुल ब्रीदिंग / सचेत रूप से सांस लेना : सांस को अंदर लेते और बाहर छोड़ते समय सांस इस क्रिया के एहसास पर ध्यान दें। साँस को धीरे-धीरे छोड़ने की प्रक्रिया भी आपके शरीर को शांत करने और आपको अधिक स्पष्टता प्राप्त करने में मदद कर सकती है। आप दिन में किसी भी समय कुछ क्षणों के लिए सचेत रूप से सांस लें और छोड़ें।

माइंडफुल ईटिंग / सचेत रूप से खाना: आप जो खा रहे हैं उस पर ध्यान दें। अन्य विकर्षणों से छुटकारा पाएं- अपने फोन, किताब और अन्य चीजों को दूर रखें। खाद्य पदार्थ, उसके रूप, रंग, बनावट, खाने की क्रिया ने एहसास आदि पर ध्यान दें।

माइंडफुल लिसनिंग / सचेत रूप से सुनना:: अपने आसपास की विभिन्न आवाजों पर ध्यान दें। जो गीत आप बजाते हैं, उसे गौर से सुनें। गीत के हर शब्द और उसकी धुन को समझने की कोशिश करें।

माइंडफुल वॉकिंग / सचेत रूप से चलना: जब आप चल रहे हों तो उस पर ध्यान दें। ध्यान दें कि जूते और जमीन का संस्पर्श आपके पैरों में कैसा महसूस होता हैं, आपके बदन पर हवा लगने से आप कैसा महसूस करती हैं, आपके आस-पास की चीजें, आपके शरीर में विभिन्न संवेदनाएं आदि को महसूस करें।

यहां उन तीस माइंडफुल गतिविधियों की सूची दी गई है, जिन्हें आप अगले महीने कैंपस में आज़मा सकते हैं।
अपने खुद की नई गतिविधियां भी बना सकते हैं।

सचेत रूप से क्लास को ओर गया

विचलित हुए बिना प्रकृति के साथ/ झील किनारे कुछ समय बिताया

कुछ समय माइंडफुल ब्रीदिंग का अभ्यास किया

भोजन को मन लगाकर खाया

अपने मित्र से बात करते वक्त मन लगाकर बातें की

सचेत होकर गाना सुना

सचेत होकर नहाया

सचेत होकर घूमने गई

सचेत होकर सोने गई

सीढ़ियों पर ध्यान से चला

दिन में किसी भी समय एक से दो मिनट शांत रहकर बिताया

सचेत होकर पेय पदार्थ पिया

बिना संगीत सुने या बिना ध्यान भटकाए व्यायाम किया

अनायास हिलने-डुलने लगा / नाचने लगा

सूर्यास्त/सूर्योदय को ध्यान से देखा

स्ट्रेचिंग किया और ध्यान दिया कि मुझे कैसा महसूस हो रहा है

ध्यान से दांत ब्रश किया (अपने दूसरे हाथ से भी इसे आजमा सकते हैं)

बैग या डेस्क को साफ किया जिससे मैं अच्छे से ध्यान लगा सकूँ

फोन को अपने पास से हटा दिया जिससे बिना वजह मैं इसका इस्तेमाल ना करूँ

हर लेक्चर से पहले थोड़ा सा रुकी और सचेत रूप से सांस लिया

सोशल मीडिया का उपयोग सोच समझ कर किया। स्क्रोल करते रहने की चाह और इससे जुड़ी बाकी भावनाओं पर भी विचार किया

नंगे पैर चला और विभिन्न एहसासों पर भी ध्यान दिया

अपनी पसंद की चीज बनाने में समय बिताया

खुद की या किसी और की तारीफ की

विभिन्न श्रेणियों जैसे आकार और रंग पर ध्यान दिया (जैसे सभी लाल वस्तुएं)

आभार पत्र लिखा

चित्र को बनाने या उसमें रंग भरने में अपना समय लगाया

चॉकलेट के टुकड़े को आराम से ध्यान लगाकर खाया

तीन ऐसी चीजों पर ध्यान दिया जिन्हें मैं सूंघ सकता हूँ

विभिन्न वस्तुओं को छूने और उनकी बनावट में अंतर को महसूस किया

अगर आपको और भी किसी तरह के सहयोग की जरूरत है तो आप बिल्कुल भी हिचकिचाएं नहीं।

  • यदि आप उपरोक्त कुछ तकनीकों को आजमा रहे हैं और फिर भी अपनी भावनाओं या शारीरिक परेशानी में ज्यादा सुधार महसूस नहीं कर रहे हैं, तो कृपया व्यक्तिगत सहायता के लिए स्टूडेंट वेलनेस सेंटर जाएं।