जोया एक छोटे शहर से थी और उसने आईआईटी-बी में आने के लिए बहुत ही कड़ी मेहनत करी थी। जब उसने आईआईटी में पढ़ना शुरू किया तो उसकी उत्सुकता का कोई ठिकाना नहीं था। बाकी सब की तरह उसने भी यही सोचा था कि वह मुंबई में और आईआईटी के कैंपस में अपने सभी दोस्तों के साथ अपने चार सालों का बहुत अच्छे से उपयोग करेगी। जैसे ही वह कैंपस में आई तो उसको एहसास हुआ कि यहां सब कितने अलग हैं। यहां सब लोग देश के अलग-अलग कोने से आए थे, और सब अपने लिए सही दिशा खोजने की कोशिश कर रहे थे। हर दिन वह अपने आसपास के लोगों और जगह हो से परिचित होने की कोशिश करती और यह अनुभव उसे व्याकुल बना देता था। हर वक्त घर की याद भी आ रही थी। वह हर वक्त यही सोचती रहती थी कि क्या वह कभी इन लोगों के साथ तालमेल बिठा पाएगी? क्या यहां पर उसे ऐसे लोग मिल पाएंगे जिनकी रूचि और विश्वास जोया से मेल खाती हो? क्या उसके कॉलेज के साथियों को वह पसंद आएगी?
शुरुआतआईआईटियन बनना और आईआईटी के कैंपस में आना यह सभी के लिए एक रोमांचक अनुभव होता है। आप हर उस बात को लेकर बहुत उत्साहित होते हैं जो आने वाले सालों के साथ आप महसूस करने वाले हैं। मगर इस नए बदलाव का मतलब यह भी होता है कि आपको अपने परिवार और अपने दोस्तों को पीछे छोड़ कर एक नए माहौल में नए तरीके से शुरुआत करनी है। अलग-अलग जगह से आए नए लोगों के बीच रहते हुए भी अपनी एक अलग पहचान बनाना और अपना अलग रास्ता बनाना मुश्किल हो सकता है।
सिर्फ फ्रेशर्स के तौर पर ही नहीं आप यहां रहते हुए कभी भी किसी भी समय अपने नए दोस्त बना सकते हैं। कुछ दोस्त या नए रिश्ते आपके कैंपस में छः महीने ,साल या दो साल बिताने के बाद भी बन सकते हैं। कुछ छात्र एक शाखा या छात्रावास में परिवर्तन करने के बाद अपने नए दोस्त इसलिए बनाते हैं ताकि उनके दोस्तों की संख्या बढ़ सके।
आईआईटी-बी में आपको शिक्षा के अलावा भी कई तरह के अनुभव मिलते हैं। कैंपस में बहुत तरह के क्लब, ग्रुप्स बने हुए हैं और कई एक्टिविटीज भी होती हैं आप उनका हिस्सा भी बन सकते हैं। आप इनमें से अपनी रुचि के हिसाब से किसी का भी हिस्सा बन सकते हैं और उन लोगों से मिल सकते हैं जिनके विचार आप से मेल खाते हो।
इसके अलावा सभी ओरियंटेशन प्रोग्राम का उपयोग करें, और कैंपस में हो रही सभी घटनाओं के अपडेट के लिए इंस्टीऐप और फेसबुक पर बने फ्रेशर्स ग्रुप से जुड़े।
अपनी रुचि बढ़ाने के लिए अपने आसपास के नए लोगों जगहों और प्रथाओं का अनुभव करें।
खुद आगे बढ़कर अपने रूममेट से बात करने की कोशिश करें, उनको समझे और उनके शौक के बारे में जानने की कोशिश करें। साथ ही ऐसे शौक खोजें जो आपके और उनके बीच मिलते जुलते हो और आप भी उनके शौक का हिस्सा बन सके।
कई बार ऐसा लगता है कि आपके आसपास के लोग बेहतर ढंग से अकादमिक एवं अन्य जरूरतों से निपट रहे हैं। याद रखें हर कोई अलग-अलग जगह से आता है और कैंपस में उपलब्ध सपोर्ट सिस्टम की मदद से आप ठीक से रह सकते हैं। अपने अनुभवों की तुलना अपने दोस्तों के अनुभवों से ना करें। हर किसी की एक अनोखी यात्रा होती है और एक रास्ता कभी भी दूसरे रास्ते से बेहतर नहीं होता।
ज्यादातर समय (खासकर शुरुआत के दिनों में) आप देखेंगे कि आप के आस पास के छात्र भी नए दोस्त बनाना चाहते हैं। बात करने के लिए कोई सामने से आपके पास चलकर आएगा इस चीज का इंतजार ना करें। यह अजीब हो सकता है मगर लोगों से बात करने की पहल करें। आप जितना आगे बढ़ कर खुद कोशिश करेंगे उतना ही आपके लिए सब आसान होता जाएगा।
आप सबके साथ घुलमिल जाना चाहते हैं और अपने नए दोस्त बनाना चाहते हैं यह बात समझ में आती है मगर खुद के व्यक्तित्व में फेरबदल करना या फिर खुद को एक नए तरीके से लोगों को पेश करना, इससे दोस्ती लंबे समय तक नहीं चलती। आप जो है वही रहे और अपने व्यक्तित्व से जुड़े रहे इससे आपके जो भी दोस्त बनेंगे उनके साथ आपकी दोस्ती बहुत लंबे समय तक चलेगी (उदाहरण के तौर पर आपको किसी से भी दोस्ती करने के लिए मादक पदार्थ लेने की आवश्यकता नहीं है)। अपनी सीमाएं बनाए रखें और ऐसे दोस्तों से सख्त दूर रहे जिनके विश्वास या आदतें आपसे मिलती-जुलती ना हो, और आप उनके साथ सहज महसूस ना करते हो।
नए लोगों के साथ जुड़ने और उनके करीब जाने का सबसे आसान तरीका है कि आप उनके साथ बैठकर, मिल-बांटकर खाना खाए।
मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा ना करें।
याद करें कि स्कूल और अपने आस पड़ोस में दोस्ती करने की कला अपने कैसे सीखी थी। अपने आप से पूछिए:
आप किस तरह से नए दोस्त बनाते थे और क्या अच्छे से कर लेते थे?
क्या कुछ ऐसी विशेषताएं हैं जो आप अपनी दोस्ती में ला सकते हैं?
आप अपने दोस्त में कौन सी विशेषताएं चाहते हैं और कौन सी नहीं?
अगर आप क्वीयर हैं तो आपके लिए दोस्त बनाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। आपको लगातार अपने आसपास की चीजों को बहुत ध्यान में रखना होगा और यह सोचना होगा की (क्या यह व्यक्ति मेरे लिए सही है? क्या मुझे इस पर भरोसा करना चाहिए? मुझे इन्हें अपने बारे में कितना बताना चाहिए? यह लोग कैसा बर्ताव करेंगे? क्या यह मेरी निजता का सम्मान करेंगे?) याद रखें आपको यह सब कुछ अकेले नहीं करना है।