त्रिशा हमेशा से पढ़ाई में अच्छी रही हैं और उसने कड़ी मेहनत से आईआईटी-बी में आने का सपना साकार किया। हालांकि वह जानती थी कि यहां कड़ी मेहनत, निरंतर असाइनमेंट और उन्हें पूरा करने की डेडलाइन होगी, और कैंपस में होने वाली विभिन्न गतिविधियों में वह भाग ले सकती है, इन सबसे उसे व्याकुलता होने लगी। वह लगातार अपनी निजी और पढ़ाई संबंधी प्रतिबद्धताओं के बीच लगातार फंसी हुई महसूस करती थी और इस बात का दबाव महसूस करती थी कि आखिर शुरू कहां से करें!
राहुल भी कुछ ऐसा ही अनुभव कर रहा था। हालाँकि वह पूरी तरह काम में जुटा था, फिर भी उसे लगता था जैसे कि वह उतना आगे नहीं बढ़ पा रहा है। किसी भी दिए गए बिंदु पर, उसके बहुत सारे काम करने छूट जाते थे! वह अक्सर खोया-खोया सा रहता था, जैसे दिशा का कोई मतलब नहीं था।
शुरुआतएक ही बार में कई चीजों को करना और उन्हें मैनेज करना वास्तव में मुश्किल हो सकता है। कभी-कभी, कदम पीछे खींचते हुए सिर्फ प्राथमिकता तय कर काम करना और लक्ष्य निर्धारित करना मददगार हो सकता है।
लक्ष्य निर्धारित करने से एक तरह का रोड मैप तैयार करने में मदद मिलती है और यह हमारे कामों के लिए दिशा प्रदान करता है। सबसे प्रभावी प्रदर्शन, कठिन लेकिन प्राप्त किए जा सकने वाले लक्ष्यों के लिए जुड़ा होता है, जिसके लिए व्यक्ति प्रतिबद्ध होते हैं (लूननबर्ग, 2011)।
हम सभी के पास घंटों की निर्धारित संख्या है। समय का सदुपयोग करने और हम जिन चीजों को करना चाहते हैं उन्हें पूरा करने का सबसे अच्छा तरीका है कि पहले अपने लक्ष्यों को प्राथमिकता दें। इसके लिए एक उपयोगी उपकरण है कोवे का समय प्रबंधन मैट्रिक्स। इसके चतुर्थांश दो मुख्य कारकों पर आधारित होते हैं- महत्वपूर्ण (ऐसे काम जो महत्वपूर्ण हैं और हमारे लक्ष्यों में योगदान करते हैं) और अत्यावश्यक (ऐसे कार्य जिन पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है) ये हमें अपने कार्यों को वर्गीकृत करने की अनुमति देते हैं और कौन से कार्य को पहले करने की आवश्यकता है उसकी प्राथमिकता तय करते हैं।
यह पहचानना महत्वपूर्ण है कि हम वर्तमान में किन गतिविधियों में अपना समय बिता रहे हैं, इससे हमें अपने शेड्यूल को समायोजित करने में सहायता मिलेगी। यह आवश्यक है कि उन गतिविधियों पर अधिक समय और ऊर्जा खर्च करें, जिनसे वाकई में हमें दीर्घकालिक परिणाम मिल सकें, ना कि उन पर समय और ऊर्जा खर्च की जाए, जिनसे अल्पकालिक परिणाम मिलते हों।
(समय प्रबंधन पर अधिक जानकारी प्राप्त करें)
लक्ष्य निर्धारित करने के लिए आमतौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला संक्षिप्त नाम 'SMART'' लक्ष्य है (S- Specific, M- Measurable, A- Attainable, R- Relevant, T- Time-bound)
विशिष्ट: लक्ष्य को अच्छी तरह से परिभाषित किया जाना चाहिए और यह स्पष्ट होना चाहिए कि आपको काम कैसे करना है। किसी सामान्य और अस्पष्ट लक्ष्य की तुलना में एक विशिष्ट लक्ष्य के पूरा होने संभावना ज्यादा रहती है। उदाहरण के लिए: "मुझे आज अध्ययन करना है" की जगह "मुझे आज रसायन विज्ञान के अध्याय-11 का अध्ययन करना है" स्पष्ट और विशिष्ट लक्ष्य है ।
मापने योग्य: आपके लक्ष्य में एक स्पष्ट रूप से स्थापित मानदंड होना चाहिए जो आपको अपनी उन्नति की निगरानी करने में मदद करेगा। अपने लक्ष्यों को विशिष्ट बनाने से उन्हें मापने में आसानी होगी। उदाहरण के लिए: "मैं एक नई भाषा सीखूंगा" के विपरीत यह लक्ष्य तैयार करना कि "मैं हर हफ्ते 100 नए शब्द सीखूंगा"।
प्राप्त किया जा सकने वाला: सर्वोत्तम स्तर के लक्ष्यों का चयन करें। लक्ष्य चुनौतीपूर्ण तो हो, लेकिन बहुत ज्यादा कठिन नहीं होना चाहिए और जिसे निरंतर प्रयास के साथ प्राप्त किया जा सके। उदाहरण: यदि आपका उद्देश्य अपनी फिटनेस पर काम करना है, तो आपका शुरुआती लक्ष्य "10 किलोमीटर जॉगिंग" करने के बजाय "1/2 किमी वॉक करना" हो सकता है।
प्रासंगिक: यह सुनिश्चित करें कि आपके व्यक्तिगत मूल्यों के हिसाब से ही आपके लक्ष्य होने चाहिए। आप में उन लक्ष्यों के प्रति काम करने की ज्यादा संभावना रहती है जो आपके साथ व्यक्तिगत रूप से मेल खाते हैं और आपकी दीर्घकालिक दृष्टि के हिसाब से होते हैं। उदाहरण के लिए: ऐसी इंटर्नशिप का लक्ष्य बनाना, जिसे बाकी सब लोग करना चाह रहे हैं (हालांकि आपके लिहाज से यह सबसे उपयुक्त नहीं है) के बजाय ऐसी किसी इंटर्नशिप का लक्ष्य बनाना, जो आपके लिए महत्व रखती हो (उस कौशल और ज्ञान के कारण, जिसका आपको लाभ मिलेगा)
समयबद्ध: लक्ष्य हासिल करने के लिए स्पष्ट शुरुआत और काम पूरा कर लेने की अंतिम तिथि की समयरेखा होनी चाहिए। समय-सीमा के बिना, तात्कालिकता का कोई अर्थ नहीं है। उदाहरण के लिए: "मैं इस पुस्तक को पढ़ना चाहता हूं" की जगह यह लक्ष्य बनाएं कि"मैं हर दो दिन में एक अध्याय पढ़ने जा रहा हूं"
अपने लक्ष्यों को लिखते समय सकारात्मक, स्पष्ट और सरल भाषा का उपयोग करना मददगार होता है।
परिणाम आधारित लक्ष्य की जगह प्रक्रिया आधारित लक्ष्य का निर्धारण करना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। ऐसे लक्ष्य रखना जिन्हें आप नियंत्रित कर सकते हैं और उन पर काम कर सकते हैं वे लक्ष्य परिणामों और अन्य व्यक्तियों पर निर्भर लक्ष्यों से ज्यादा फायदेमंद होते हैं। जैसे ' इतने मार्क्स हासिल करने के लिए पढ़ाई करूंगा' के स्थान पर 'इतने घंटे नियमित रूप से पढ़ाई करूंगा' को लक्ष्य बनाएं।
लक्ष्य के हिसाब से अपने माहौल को अनुकूल बनाना और अपनी उन्नति को ट्रैक करने के लिए दृश्य संकेतों का उपयोग करना भी सहायक हो सकता है। पोस्टर लगाएं, अपने कैलेंडर पर निशान लगाएं, लकीरें बनाएं, टू-डू सूची से चीजों को हटाएं, जो भी तरीका आपके लिए काम करता है उसे खोजें।