Urgent Support

समय प्रबंधन

शर्मा जी

"आरव क्या तुम आईआईटी में पढ़ रहे हो?"

आरव ने गर्व से कहा " जी हां!"

आरव के पड़ोसी शर्मा जी ने उसकी पीठ थपथपाई और थोड़ी चिंतित मुद्रा में रुके!

शर्मा जी ने आगे कहा

"ओके, मुझे लगता है कि वहां तुम्हारे पास बहुत सारा काम रहता होगा, एक के बाद एक क्लास अटेंड करना, दिनभर में बहुत कुछ करना। तुम अपना समय कैसे मैनेज कर पाते होंगे? ये वाकई चुनौतीपूर्ण रहता होगा!"

जबकि आरव सोचता था कि आईआईटीयन कहलाना हमेशा गर्व का पल होता है, लेकिन इसके नाम के साथ ही बहुत कुछ जुड़ा है। कई बार तो प्रतिबद्धताओं और समय सीमा को संभालना काफी मुश्किल हो जाता है!

आरव जैसे कई छात्र हैं जिन्हें घबराहट महसूस होती है और यह बिल्कुल सामान्य है। आप हमेशा ऐसी दौड़ में रहते हैं जहां समय के साथ आपका मुकाबला है ... और हर बार आपको लगता है कि समय की ही जीत हुई!

खैर , समय का प्रबंधन करना, जुगाड़ लगाने से काफी कुछ अधिक है।

शुरुआत

आईआईटी-बी के छात्र के रूप में, अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की दौड़ में कभी-कभी घबराहट होना स्वाभाविक है। कई विद्यार्थी भी बताते हैं कि उन्हें लगता है कि वे समय से पीछे चल रहे हैं और शेड्यूल के मुताबिक चलने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में एक तरीका जो वास्तव में सहायक सिद्ध हो सकता है, वह है प्रभावी रूप से अपने समय का प्रबंधन करना।

निपटने का तरीका

'द 7 हैबिट्स ऑफ हाईली इफेक्टिव टीनएजर्स' किताब के लेखक शॉन कोवे ने अपनी पुस्तक में एक उदाहरण के जरिए बताया है कि किसी सूटकेस में ठूंस-ठूंसकर कपड़े भरने की जगह यदि कपड़ों को तह करके रखा जाए तो यह ठीक तरह से भरता है। यही सिद्धांत हमारे समय के साथ भी लागू होता है। समय चतुर्थांश का उपयोग कर हमें अपने दिनों को व्यवस्थित करने में सहायता मिलती है। इससे हम अपने एक दिन में ज्यादा चीजों विशेषकर महत्वपूर्ण चीजों को शामिल कर सकते हैं।

समय चतुर्थांश

इस चतुर्थांश के चार हिस्से मुख्य दो कारको पर आधारित हैं - महत्वपूर्ण (ऐसे काम जो महत्वपूर्ण हैं और हमारा लक्ष्य पूरा करने में सहयोग करते हैं) और अत्यावश्यक (ऐसे काम जिन पर तुरंत ध्यान देना जरूरी है).

कुछ दिन ईमानदारी से और बिना निर्णय किए हुए उस समय को रिकॉर्ड करें या इस पर ध्यान दें कि आपने किन-किन गतिविधियों में अपना समय बिताया।

आपको क्या लगता है कि आप किस चतुर्थांश में अपना अधिकांश समय बिता रहे हैं?

  • चूंकि चतुर्थांश-1 में हमेशा वही कार्य होते हैं जिन्हें हम नियंत्रित नहीं कर सकते हैं (जैसे ऐसा असाइनमेंट जो बहुत जल्द पूरा करना हो या कोई व्यक्तिगत आपातकालीन स्थिति, जो हमें अपने निर्धारित शेड्यूल से अलग कर देती है), जब हम टाल-मटोली करने लगते हैं तो इस श्रेणी में आने वाले कामों की संख्या बढ़ भी जाती है (उदाहरण के लिए- किसी असाइनमेंट पर तब काम करना, जब निर्धारित से एक दिन पहले भारी दबाव के हालात बन जाते हैं) इस स्थिति में काम खराब होने के साथ ही भारी तनाव और अपने प्रदर्शन से नाखुशी महसूस होती है। यदि आपके साथ ऐसा है, तो यहां कुछ तरीके हैं जिनसे आप टाल-मटोली के रवैये से निपट सकते हैं!

    और अधिक जानिए

  • यदि आप अपना बहुत अधिक समय चतुर्थांश-3 में बिता रहे हैं, तो संभावना है कि आपका ध्यान भटकता है (उदाहरण के लिए जैसे ही आपके फोन की बीप बजती है, तो यह जानते हुए भी कि यह कोई जरूरी मैसेज नहीं है, फिर भी आप टेक्स्ट को चेक करने बैठ जाते हैं) या ऐसी गतिविधियों में शामिल होना, जो अन्य लोगों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन आपके लिए नहीं (उदाहरण के लिए अपनी पढ़ाई के लिए निर्धारित समय पर दूसरों के साथ घूमने-फिरने जाने के लिए हां कह देना)। अंत में आपको लगता है कि आप दूसरों का अनुसरण कर रहे हैं और अपनी दिनचर्या में कमी महसूस करते हैं। वे चीजें जो आपके लक्ष्य के लिए महत्वपूर्ण नहीं हैं आप उनके लिए ना कहने और अपने भटकाव को सीमित करने की कोशिश करके शुरुआत कर सकते हैं ।

  • आराम करना और अपने लिए खाली समय निकालना बहुत महत्व रखता है। लेकिन यदि यह बहुत ज्यादा मात्रा में किया जाए (जैसे किसी धारावाहिक को छोटे-छोटे हिस्सों में देखने के बजाय लगातार पूरी श्रृंखला में देखना) तो यह समय की बर्बादी बन जाता है । यदि आप चतुर्थांश-4 में बहुत अधिक समय बिता रहे हैं, तो आप खुद को दोषी महसूस कर सकते हैं या स्वयं के नियंत्रण में कमी की भावना महसूस कर सकते हैं। आपको इन गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाने की जरूरत नहीं है बल्कि इनमें कमी लाना शुरू कर दें।

कुछ दिन ईमानदारी से और बिना निर्णय किए हुए उस समय को रिकॉर्ड करें या इस पर ध्यान दें कि आपने किन-किन गतिविधियों में अपना समय बिताया।

अपना सबसे ज्यादा समय उत्पादकता वाले चतुर्थांश-2 में बिताने के लिए क्या करें?

जिन कामों में हम संलग्न रहते हैं उनमें से बहुत सी चीजें या तो तात्कालिकता पर या समय की बर्बादी पर आधारित होती हैं। हालांक यह हमेशा खराब नहीं होता है, लेकिन समस्या तब पैदा होती है जब अत्यावश्यक काम आ जाने पर महत्वपूर्ण चीजें एक तरफ धरी रह जाती हैं। ये कुछ तरीके हैं, जिनसे आप शुरुआत कर सकते हैं।
प्लानर

आप इसे एक प्लानर से या किसी भी ऐप से शुरू कर सकते हैं। आपको लिए यह उपयोगी हो सकता है। मुख्य बात है कि इसमें अपने असाइनमेंट्स, काम और लक्ष्यों को लिखकर फिर उन्हें ट्रैक करें, और तब अपने सप्ताह (या दिन) की अग्रिम योजना बनाएं।

'बड़े कामों' और समय खंड के साथ योजना बनाना

सबसे पहले, उन महत्वपूर्ण कार्यों की पहचान करें, जिन्हें इस सप्ताह पूरा करने की जरूरत है, इन्हें बिग रॉक्स कहा जाता है। ये बिग रॉक्स आपके द्वारा निभाई जाने वाली विभिन्न भूमिकाओं से भी संबंधित हो सकती हैं (उदाहरण के लिए वे महत्वपूर्ण कार्य जो आपको एक छात्र, दोस्त या भाई-बहन आदि के रूप में निपटाने हैं) इससे आपको अधिक संतुलित महसूस करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही अन्य कई काम भी आपको महत्वपूर्ण लग सकते हैं, कोशिश करें और इन्हें अगले तीन दिन में यानि 7 से 10 दिन के आसपास सीमित करें।

इसके बाद, इन बड़े कामों को अपने कैलेंडर पर लिखकर समय खंड बना लें। बिग रॉक्स प्रयोग इस विचार पर आधार होता है कि यदि आप पहले छोटे कंकड़ों ( जैसे- समय को बर्बाद करने वाले काम, जो आपको लक्ष्य तक पहुंचाने में योगदान नहीं करते हैं), से जार भरकर फिर उसमें बड़ी चट्टानें डालते हैं, तो वे इसमें फिट नहीं हो सकते हैं। लेकिन अगर आप पहले बड़े पत्थर भरने से शुरुआत करते हैं और फिर इसमें छोटे-छोटे कंकड़ डालते हैं, तो वे बड़ी पत्थरों के बीच की खाली जगह में अच्छी तरह से फिट हो जाते हैं। इसलिए, अपने शेड्यूल में महत्वपूर्ण कार्यों के लिए समय निर्धारित करें, आपकी अन्य गतिविधियां इसमें खुद-ब-खुद फिट हो जाएंगी।

  • जहां तक संभव हो अपनी योजना को वास्तविक रूप से बनाने की कोशिश करें। हममें से कुछ लोग अपनी क्षमताओं को कमतर आंकते हैं तो कुछ अपनी क्षमताओं को ज्यादा आंकते हैं। अपने पिछले अनुभवों के बारे में सोचें और उसी के अनुसार अपनी योजनाओं को तैयार करें।
  • अपने प्लानर को ऐसे स्थान पर टांगे या ऐसी जगह रखें कि आपकी नजर उस पर बार-बार पड़े। यदि आप प्लानर के हिसाब से अपना कोई काम निपटा लेते हैं तो खुद को पुरस्कृत करना ना भूलें!
  • स्वयं को कमजोर समझते हुए अपनी क्षमता और कार्यों के बारे में नकारात्मक बोलने से बचें। खुद को प्रेरित करने के लिए आप दृढ़ वचनों का प्रयोग कर सकते हैं जैसे "मुझे पता है, मैं इस काम को पूरा कर सकता हूं"; "मैं जानता हूं कि मैं बहुत मजबूत हूं"।

मदद तलाशिए

  • यदि आपको अपने पाठ्यक्रम में कठिनाई हो रही है या कोई शैक्षणिक समस्या है तो इसके लिए, आपके संपर्क का पहला बिंदु संकाय सलाहकार हो सकता है। विभिन्न पाठ्यक्रमों के बारे में आपके कोई विशेष प्रश्न भी हो सकते हैं, ऐसी स्थिति में आप अपने संबंधित पाठ्यक्रम प्रशिक्षक से बात कर सकते हैं। डीएएमपी मेंटर (यदि कोई है) तो वह भी आपकी मदद करेगा।
  • यदि आप कैंपस की लाइफ या अन्य मामलों में सामंजस्य बैठाने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं, आपको आईएसएमपी / आईएससीपी मेंटर के पास पहुंचना चाहिए! आपकी समस्या विंग मेट्स के बारे में या अपने शेड्यूल को मैनेज करने के बारे में हो सकती है - तो आपका मेंटर वहीं है, जो ऐसी समस्याओं को संभालता रहा है।
  • यदि आप इस उलझन में हैं कि मेरे साथ यह सब क्या हो रहा है, और आप पूरी तरह हार मान चुके हैं, तो स्टूडेंट वेलनेस सेंटर के काउंसलर से बात करने से आपको राहत मिल सकती है और आगे आप क्या कर सकते हैं, वे इस बारे में आपको मार्गदर्शन दे सकते हैं।
  • इसके साथ ही, आपके माता-पिता आपसे सिर्फ एक कॉल की ही दूरी पर हैं। इसलिए यदि आप मन हल्का करना चाहते हैं, तो उनसे बातचीत करने से पीछे न हटें।